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न्यूनतम हो कोरोना से मृत्यु: कमिश्नर डॉ. शर्मा
इंदौर. संभागायुक्त डॉ. पवन कुमार शर्मा की अध्यक्षता में आज इंदौर में कोविड पॉज़िटिव प्रकरणों के प्रबंधन के संबंध में क्लिनिकल प्रोटोकॉल की समीक्षा के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की बैठक संपन्न हुई। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से उन्होंने कहा कि इंदौर संभाग में स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी सतर्क रहें और इस बात का प्रयास करें कि कोराना पीड़ितों की कम से कम मृत्यु हो और उनका ठीक ढंग से इलाज हो।
डॉ. शर्मा ने बैठक में कहा कि इंदौर संभाग में कोविड-19 बीमारी को नियंत्रित करने के लिये मृत्यु के कारणों का पता लगाया जा रहा है और हमारा प्रयास है कि इंदौर संभाग में कोरोना से मृत्यु दर को शून्य पर लाया जाये। उन्होंने यह भी कहा कि इंदौर संभाग में कोरोना प्रकोप को देखते हुए अस्पतालों में और अधिक बिस्तरों और स्टॉफ की जरूरत पड़ सकती है। इंदौर में सभी अस्पतालों (शासकीय और निजी) को मिलाकर लगभग 20 हजार बेड हैं। मगर चिकित्सकों की कमी है, जिसे पूरा किये जाने का प्रयास किया जाना चाहिये।
कोरोना पीड़ित मरीजों का डेथ ऑडिट जरूरी
कमिश्नर डॉ. शर्मा ने कहा कि इस बीमारी से निपटने के लिये डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टॉफ को टीम भावना से काम करना होगा। इसके अलावा जिन मरीजों की मृत्यु हो रही है, उनकी हिस्ट्री और बैकग्राउण्ड की जानकारी हासिल करना जरूरी है। कोरोना से मृत प्रत्येक रोगी की अलग-अलग फाइल होना जरूरी है। मरीजों की तुरन्त जाँच और समुचित इलाज अगर किया जायेगा तो मृत्यु दर में कमी आयेगी।
कोरोना के मामले में किसी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। कोरोना के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हर सप्ताह समीक्षा की जायेगी और संभाग स्तरीय वरिष्ठ अधिकारियों के व्हाट्सअप ग्रुप बनाये जाएंगे, जिससे वैचारिक आदान-प्रदान में कोई विलम्ब या कठिनाई न हो।
कोविड-19 की संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक हर हफ्ते कमिश्नर कार्यालय में आयोजित की जायेगी। संभाग के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों की भी बैठक शीघ्र आयोजित की जायेगी। कोविड-19 पीड़ित मरीजों का डेथ ऑडिट जरूरी है।
कमिश्नर डॉ. शर्मा ने कलेक्टर बड़वानी श्री अमित तोमर से दूरभाष पर कहा कि बड़वानी जिले के दो मरीज अनिशा बी और नरगिस बी की मृत्यु इंदौर में हुई है। इनकी हिस्ट्री और बैकग्राउण्ड की जाँच रिपोर्ट शीघ्रातिशीघ्र भेजी जाये, जिससे स्वास्थ्य अमले को केस स्टडी में दिशा मिल सके।
बैठक में बताया गया कि सबसे ज्यादा मरीज अरविन्दो अस्पताल में भर्ती हैं और सबसे ज्यादा मरीज वहाँ पर ठीक भी हो रहे हैं। 25 से 100 मरीज रोज अरविन्दो अस्पताल में स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं। नर्स, वार्ड ब्वाय और स्वीपर की कोई कमी नहीं है। हर मरीज में अलग-अलग तरह से अपना स्वभाव बदलता रहता है।
रेमजेसिविर और हाइड्रोक्सी क्लोरो क्विन दवा अधिकांश मामलों में कारगर साबित हुई है। इसकी रामबाण औषधि और वैक्सिन की खोज जारी है। इस बीमारी में एण्टी-वायरस ड्रग्स काम आ रही है। इन दोनों दवाओं का ट्रायल संयुक्त राज्य अमेरिका और युनाइटेड किंगडम में भी चल रहा है। भारत में एण्टी-वायरस ड्रग्स के रूप में क्लोरोक्विन का पिछले 50 साल से इस्तेमाल हो रहा है।
कोई भी व्यक्ति शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिये विटामिन-बी, सी, डी और जिंक का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से कर सकते हैं। गिलोय और दूध में हल्दी डालकर भी पीने और रोज आधा घण्टा प्राणायाम करने से भी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढे़गी। इंदौर जिले में फीवर क्लीनिक से बहुत फायदा हुआ है। फीवर क्लीनिक में प्राथमिक उपचार से ही 90 प्रतिशत मरीज ठीक हो गये हैं।
कमिश्नर डॉ. शर्मा ने क्षेत्रीय स्वास्थ्य संचालक डॉ. जे.एस. अवास्या से इंदौर संभाग के सभी जिलों में कोविड-19 से पीड़ित मरीजों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने धार, झाबुआ, बड़वानी और बुरहानपुर जिलों की समीक्षा की। डॉ. अवास्या ने बैठक में बताया कि अलीराजपुर जिले में इस समय कोई भी मरीज कोविड-19 से पीड़ित नहीं है।
बैठक में डीन एमजीएम कॉलेज डॉ. ज्योति बिंदल, डॉ. सलिल भार्गव, इंदौर मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सतीश जोशी उपस्थित थे।


